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जातिगत अत्याचार के चौंकाने वाले खुलासे, अब इस नंबर पर दर्ज करा सकते हैं शिकायत

अगर आपके साथ भी जाति आधारित भेदभाव हो रहा है, तो आप राष्ट्रीय अत्याचार निवारण हेल्पलाइन 14566 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि भारत में जातिवाद आखिर कब खत्म होगा?

नई दिल्ली। वो दौर बीत चुका है जब दलित और आदिवासी समाज अपने साथ होने वाले अन्याय और अत्याचार को किस्मत मानकर चुप रहता था। अब यह समाज अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठा रहा है, और यह बात संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में पेश हुए ताजा आंकड़ों से भी साबित होती है। हालांकि ये आंकड़े इस बात की भी गवाही देते हैं कि समाज में जातिवाद की जड़ें अब भी गहरी हैं।

साल 2020 में केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने दलितों और आदिवासियों के लिए एक विशेष एससी-एसटी अत्याचार निवारण हेल्पलाइन नंबर जारी किया था। बीते लगभग पांच वर्षों में इस हेल्पलाइन पर 6 लाख 34 हजार से अधिक कॉल्स दर्ज की गई हैं।

यह जानकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने खुद दी है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार—

  • सबसे ज्यादा 3,40,000 कॉल्स उत्तर प्रदेश से आईं।
  • दूसरे स्थान पर बिहार रहा, जहां से 59,205 कॉल्स प्राप्त हुईं।
  • तीसरे स्थान पर राजस्थान रहा, जहां से 40,228 कॉल्स दर्ज हुईं।

आंकड़ों से पता चलता है कि 2020 में जहां हेल्पलाइन पर केवल 6,000 कॉल्स आई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या 1.05 लाख से अधिक हो गई। इसका मतलब है कि एससी-एसटी समुदाय अब अत्याचार की घटनाओं को रिपोर्ट करने में पहले से अधिक सक्रिय हो रहा है। हालांकि ये केवल हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज शिकायतों के आंकड़े हैं, जबकि पुलिस थानों में दर्ज मामलों के आंकड़े अलग हैं।

किसी भी शिकायत को अत्याचार तभी माना जाता है, जब वह दो केंद्रीय कानूनों—

  1. नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955
  2. अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989
    —के तहत आती हो।

अगर आपके साथ भी जातिगत भेदभाव हो रहा है और आपका मामला इन अधिनियमों के दायरे में आता है, तो आप भी राष्ट्रीय अत्याचार निवारण हेल्पलाइन 14566 पर संपर्क कर सकते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी वही है—भारत में जातिवाद आखिर कब थमेगा?

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